यूंही इस ग्रह को अंतरिक्ष का वैक्यूम क्लीनर नहीं कहा जाता, इसके पास है ये अनो’खी ताकत..

सौरमंडल (Solar system) में सबसे अच्छा ग्रह धरती (Earth) को माना जाता है। लेकिन वैज्ञानिकों का कहना है कि अगर सौरमंडल में गुरु ग्रह यानी ज्यूपिटर (Jupiter) न होता तो शायद अब तक धरती बची ही न होती। अंतरिक्ष में धरती से भी बड़े आकार के धूमकेतु (Comet) देखे जाते हैं। इन बड़े धूमकेतु से ज्यूपिटर धरती की र’क्षा करता है। वैज्ञानिक मानते हैं कि गुरु की धुरी पर धरती से 8 हजार गुना या इससे भी ज्यादा धूमकेतु ट’कराते रहते हैं। अगर गुरु ग्रह इसका सामना न करे तो ये धरती को पूरी तरह न’ष्ट कर सकते हैं। बता दें कि गुरु ग्रह को अंतरिक्ष का वैक्यूम क्लीनर भी माना जाता है। ये हर उस चीज को अपनी ओर खींच लेता है जो धरती के लिए ख’तरा है।

दरअसल गुरु यानी बृहस्पति ग्रह से ट’कराकर वे धूमकेतु खत्म हो जाते हैं, जो आगे बढ़ने पर धरती से टकराकर उसे तबा’ह कर सकते थे। गुरु ग्रह सोलर सिस्टम के सबसे पुराने ग्रहों में से एक है और साथ ही ये पूरे सोलर सिस्टम का सबसे बड़ा ग्रह हैं। इस ग्रह में धरती के आकार के 1300 ग्रह आसानी से समा जाएंगे। गुरु ग्रह को ऐसे ही अंतरिक्ष का वैक्यूम क्लीनर नहीं कहा जाता। बल्कि इसके पीछे पूरी एक कहानी है। नब्बे के दशक में धूमकेतु शूमेकर-लेवी पर सारे खगोलशास्त्रियों की नजरें टिकी हुई थीं।


बता दें कि धूमकेतु को गुरु ग्रह के गुरुत्वाकर्षण ने जकड़ लिया था और ये सौरमंडल में कहीं और जाने की बजाए धीरे-धीरे उसकी ओर खिंचता गया। आखिर में धूमकेतु गुरु ग्रह के पास जाता गया और अचानक से ट’करा गया। जैसे ही धूमकेतु गुरु ग्रह से ट’कराया तो एक भयंकर वि’स्फोट हुआ। जिसके बाद धूमकेतु वहीं न’ष्ट हो गया। बता दें कि बिना किसी जमीन के इस ग्रह की गति काफी तेज है। यही कारण है कि धरती के 11.9 साल में बृहस्पति ग्रह का केवल एक साल होता है।

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