वो तीन बड़े मौक़े जब एक वोट ने बदल दी थी बाज़ी, घरवालों ने ही…

इन दिनों देश भर में चुनावी माहौल है ऐसे में जहाँ कई लोग बढ़ चढ़कर हिस्सा ले रहे हैं वहीं कुछ इस बात को टाल देते हैं। लोगों को लगता है कि बस एक वोट से ऐसा क्या फ़र्क़ पड़ जाएगा। लेकिन आप शायद ये नहीं जानते कि एक वोट तख़्ता पलट सकता है। हर वोटर के पास वो ताक़त है जिसका इस्तेमाल उसे करना ही चाहिए। आज आपको कुछ ऐसे वाक़ये बताने जा रहे है जहाँ एक वोट ने बदल दी थी क़िस्मत।

राजस्थान में साल 2008 के विधानसभा चुनाव में सीपी जोशी कांग्रेस की तरफ से मुख्यमंत्री पद के दावेदार थे। इस चुनाव में उन्हें 62,215 वोट मिले, जबकि कल्याण सिंह को 62,216 वोट हासिल हुए। आपको यहाँ ये बता दें कि उस रोज सीपी जोशी की मां, पत्नी और ड्राइवर ने मतदान नहीं किया था. यानी अगर ये तीनों वोट देते तो भी सत्ता उनके पक्ष में होती. वैसे सीपी जोशी अकेले नहीं हैं, जो एक वोट के कारण विधानसभा चुनाव हारे, बल्कि इस कतार में एक और नाम भी है.


EVM
साल 2004 में जेडीएस के एआर कृष्णमूर्ति सिर्फ एक वोट से विधायक बनने से चूक गए थे. इसी साल कर्नाटक में हुए विधानसभा चुनावों में कृष्णमूर्ति को 40,751 वोट मिले, जबकि कांग्रेस के आर ध्रुवनारायण को 40,752 वोट हासिल हुए. यहां भी हैरान करने वाली बात ये है कि कृष्णमूर्ति के कार ड्राइवर ने मतदान नहीं किया था क्योंकि उसे समय नहीं मिल सका था.अगर उसने वोट दिया होता तो जीत कृष्णमूर्ति की होती।

Atal Bihari Vajpeyi
कुछ यही हुआ था अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में भी। बात साल 1999 की है. केंद्र में वाजपेयी की सरकार कई पार्टियों के समर्थन से बनी थी. लेकिन एआईएडीएमके के समर्थन वापस लेने के बाद सरकार को संसद में विश्वास प्रस्ताव का सामना करना पड़ा. उनके पक्ष में 269 वोट पड़े, जबकि विरोध में 270 वोट पड़े. इस तरह केवल एक वोट से सरकार गिर गई. तो आज ही अपने वोट का महत्व समझकर वोट डाल आएँ क्या पता आपके एक वोट से ही सत्ता पलट जाए।

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