मेहर और जहेज़ जैसी ग़ै’र शरई प्रथाओं के खिला’फ शुरू होगा अभियान, का’जियों ने दिया…

समाज में शादी का मुद्दा सबसे अहम मुद्दा है। किसको लेकर कई कानून बनाए गए हैं। मु’स्लिम समुदाय में शादी की कुछ ऐसी रस्में हैं जिसका कोई मतलब ही नहीं हैं। लेकिन फिर भी लोग इसको मनाते हैं। इस्लाम के नजरिए से भी देखा जाए तो ये गलत हैं। इसमें खास तौर पर जहेज़ है। जहेज़ देना और लेना दोनों की गलत है। इस पर तो सरकार की ओर से भी रोक लगाई हुई है। अगर कोई शख्स जहेज़ की मांग करता है तो उसके खिला’फ स’ख्त से स’ख्त कार्रवाई की जाएगी। बता दें कि जमीअतुल उलेमा के अध्यक्ष हाफिज लईक खान के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने आर्मर, बलकोंडा और भीमगल का दौरा किया है।

इस दौरान उन्होंने काफी लोगों से मुलाकात की और शादी के दौरान होने वाली ‘ग़ै’र शरई’ प्रथाओं के बारे में बातचीत की। उन्होंने यहां म’स्जिद समितियों और काजी के अधिकारियों से बातचीत के दौरान बताया कि किस तरह ये प्रथाएं लड़कियों की शादी में रुकावट पैदा कर रही हैं। उन्होंने कहा कि इस तरह को प्रथाओं को ख’त्म करना चाहिए। गौरतलब हैं कि सभी काजी उनकी इस बात से सहमत हैं और उन्होंने इस तरह की प्रथाओं को मिटाने के लिए अपना पूर्ण समर्थन देने की घोषणा की है।


मैरिज
इन प्रथाओं में गीत, संगीत, जाहेज़, जोड़ी की रक़म ’नकद, आस्थगित डावर (मैहर) शामिल हैं। उनका कहना है कि ये प्रथाएं मु’सलमानों द्वारा व्यापक रूप से प्रचलित हैं। हाफिज लईक खान ने अपने एक बयान में कहा कि “विवाह में इस तरह की प्रथाओं के खिला’फ अभियान शुरू करने के लिए “रिफॉर्म सोसाइटी प्रोग्राम” में एक सर्वसम्मत प्रस्ताव अपनाया गया था। सभी क़ाज़ी और म’स्जिद समितियों के अधिकारी इस अभियान में अपना समर्थन दे रहे हैं जो एकीकृत जिला स्तर पर शुरू किया जाएगा।” इस अभियान के चलते इस प्रथाओं को ख’त्म किया जाएगा। जिससे लड़कियों की शादी करने में आसानी पैदा होगी।

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