पश्चिम बंगाल में EVM-VVPAT पर आया फ़ै’सला, कोलकाता हाईकोर्ट ने..

ईवीएम-VVPAT की गिनती करने संबंधी बनगांव के पूर्व विधायक गोपाल सेठ के आवेदन को हाइकोर्ट ने ठुकरा दिया है. मुख्य न्यायाधीश ने इस मामले को खारिज कर दिया. ज्ञात हो कि ईवीएम-VVPAT की गिनती के लिए पूर्व विधायक ने इससे पहले चुनाव आयोग से आवेदन किया था, पर आयोग ने भी उनके इस आवेदन को ठुकरा दिया था. इसी आदेश को हाइकोर्ट ने भी बहाल रखा है.

दरअसल ईवीएम और वीवीपीएटी की गिनती के लिए पूर्व विधायक ने इससे पहले चुनाव आयोग से भी आवेदन किया था। लेकिन चुनाव आयोग द्वारा भी इस आवेदन को ठुकरा दिया गया था अब चुनाव आयोग के बाद कोलकाता हाई कोर्ट ने भी इस आदेश को बहाल रखा है। जानकारी के लिए आपको बता दें कि ईवीएम के बारे में- ईवीएम (EVM) मतदाताओं के मत को दर्ज करने का एक इलेक्ट्रॉनिक उपकरण है।


इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन दो इकाइयों से बनी होती हैं। कंट्रोल यूनिट एवं बैलेटिंग यूनिट. दोनों यूनिट पांच मीटर लंबे केबल से जुड़ी होती हैं। नियंत्रण इकाई पीठासीन अधिकारी या मतदान अधिकारी के पास होती है। जबकि बैलेट यूनिट को मतदान कम्पार्टमेंट में रखा जाता है। पश्चिम बंगाल समेत देश के 4 राज्यों एवं एक केंद्रशासित प्रदेश में मार्च से अप्रैल के बीच विधानसभा चुनाव कराये जा रहे हैं।

मतदान के लिए इक्लेट्रल रोल, पोलिंग स्टेशन, इवीएम व पोलिंग पर्सनल का होना अनिवार्य है। वहीं ईवीएम को लेकर कई बार विपक्षी पार्टी चुनाव आयोग पर निशाना साध चुकी है। आपको बता दें कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव की 294 सीटों के लिए पहले चरण के मतदान 27 मार्च को होने वाले हैं। जिसमें भारतीय जनता पार्टी और तृणमूल कांग्रेस के बीच सबसे बड़ी टक्कर होती नजर आ रही है।

राज्य में इस कड़ी में दोनों राजनीतिक दलों द्वारा बढ़-चढ़कर चुनाव प्रचार किया जा रहा है। ममता बनर्जी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ ग्रह मंत्री अमित शाह के बीच जनसभाओं के द्वारा तकरार होती हुई नजर आ रही है।

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