123 सालों से ज़ंजी’रों में कै’द है ये बरगद का पेड़, वजह बहुत ख़ास है

दुनिया में हर दिन ऐसे-ऐसे कि’स्से सुनने को मिलते हैं, जिन पर पहली बार में यकीन करना बहुत मु’श्किल हो जाता है. यह पूरी दुनिया अजी’ब रह’स्यों से भ’री प’ड़ी है. दुनिया भर की अजी’ब रह’स्य और है’रान करने वाली घ’टनाएं सुनने और देखने वाले का दिमा’ग हि’लाकर रख देती है. ऐसे में आज हम भी आपके लिए एक है’रान करने वाली घ’टना या जा’नकारी लाए है. आइए आपको एक रो’चक घ’टना से रूबरू कराते हैं।


आपने आज तक पेड़ों के बारे में कई है’रान करने वाली बातें सुनी होगी. पेड़ हमे छाया, फल, हवा, ऑक्सीजन, फूल आदि प्र’दान करते है, लेकिन आपको कहे कि एक पेड़ ऐसा है जिसे जं’जीरों ने सालों से कै’द कर रखा है तो आपकी इस पर क्या प्रतिक्रि’या होगी. पहले तो आप इस बात पर विश्वास नहीं कर पाएंगे. हालांकि यह सच है. पाकिस्तान में एक ऐसा ही पेड़ मौ’जूद है, जिसे किसी कै’दी या किसी खूंखा’र जा’नवर की तरह बड़ी-बड़ी जं’जीरों ने जक’ड़ रखा है.

पाकि’स्तान में एक पेड़ हर समय सुर्ख़ियों और च’र्चाओं में बना रहता है. यह माम’ला पाकि’स्तान के पे’शावर का है. यहां एक बरगद का पेड़ है जो बीते कई सालों से जं’जीरो में कै’द है. आइए आपको बताते हैं कि आ’खिर इस पेड़ को जंजी’रों में क्यों रखा जाता है? यह कहानी है आज से 123 साल पहने यानी कि साल 1898 की. साल 1898 से इस पेड़ को जं’जीरों ने कै’द कर रखा है.

दरअसल, भारत की गुला’मी के दौरान एक अग्रे’ज अफ’सर ने न’शे में धु’त्त होकर इस पेड़ को गिर’फ़्तार करने का आ’देश दिया था. तब से लेकर अब तक यह पेड़ इसी हा’ल में है. पाकि’स्तान के खै’बर पख्तू’नख्वा’ह में तै’नात जे’म्स स्क्वि’ड नामक एक ब्रिटि’श अफ’सर एक बार न’शे में पा’र्क में ट’हल रहा था.

न’शेड़ी अंग्रेज अफ’सर को न’शे में लगा कि पेड़ उसके साम’ने से भा’ग रहा है और ऐसे में उसने सिपाहियों को पेड़ को गिर’फ़्तार करने का आ’देश दे दिया. सिपा’हियों ने पेड़ को अफ’सर के कहने पर जंजी’रों की म’दद से गिर’फ़्तार कर लिया. आज भी यह पेड़ इसी हाल’त में है और पाकि’स्तान में यह द’र्शनीय है. यह पर्य’टकों का ध्यान अपनी ओर खीं’चते रहता है.

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